Lakshman Khairwal(Great Writer,Journalist,&Legal Adviser)

Saturday, May 28, 2011

४९ कर्मचारियों का मुक़दमा जिसने मेरा भाग्य बदल दिया !

एग्रो इंडूसट्रियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (कृषि यन्त्रशाला)तालकटोरा रोड,लखनऊ के ८२ कर्मचारियों को १३.०७.१९७३ में छटनी के नाम पर कार्य से पृथक कर दिया गया था। एग्रो के अन्य कर्मचारियों को मुस्तकिल बनाये जाने का औद्योगिक विवाद माननीय पीठासीन अधिकारी औद्योगिक न्याय्धिकरण () लखनऊ के समक्ष उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संदर्भित किया गया था।जो उस समय न्याय्धिकरण के समक्ष विचाराधीन था। चुकी उत्तर प्रदेश औध्योघिक विवाद अधिनियम १९४७ की धारा ऍफ़ के अंतर्गत यह प्राविधान है कि कर्मचारियों से सम्बंधित किसी विवाद के कार्यवाही के दौरान सेवायोजक कर्मचारियों कि सेवाओ अवस्था में सक्षम न्यायलय के अनुमति के बगैर परिवर्तन नहीं कर सकते है। इसलिए मैंने कार्य से पृथक किये गए कर्मचारियों का विवाद अंग्रेजी में बहुत ही मजबूती से तैयार किया। मैंने सोचा कि कही कोई गलती रह जाये इसलिए अपने वारिसठ सहयोगी श्री रमेश चंद श्रीवास्तव के पास एक कर्मचारी को भेजा कि वह पढ कर देख ले कि याचिका मे कोई कमजोरी या खामी तो नहीं है। उन्होने हमारे याचिका को पढ कर फाढ दिया और कर्मचारी से कहा कि वो बेवकूफ है यह मामला चल नहीं सकता है। कर्मचारी मुहम्मद अहमद फाढा हुआ कागज मेरे पास लेकर आया और कहने लगा कि आप बेकार मे माथा पच्ची करे हम लोगो को आप काम पर बहाल नहीं करा सकते है !मैंने फटे हुए कागजो को लेकर जोड़ा और पुनह: टाइप करा कर कर्मचारियों से कहा की जिस को मेरे ऊपर आख़ बंद कर के विश्वास हो वो कागज पर दस्तखत करेअब ८२ की जगह केवल ४९ आदमियों ने ही दस्तखत करेमै उस मुक़दमे की तैयारी में जी जन से जुट गया


जब ४९ कर्मचारियों के वेतन का निर्णय उत्तर प्रदेश शाशन के गज़ट में मार्च १९७४ को प्रकाशित हो कर आया तो जिन लोगो ने हस्ताक्ष्र नहीं किया था सभी दौड़ कर आने लगे उस मुक़दमे के गज़ट में प्रकाशन के बाद मेरे जीवन के १८ वर्षो की तपस्या का फल मुघे मिलने लगा



पंडित मोती लाल नेहरु का यह कहना बहुत सही था की वकालत के पेशे में एक मुक़दमा वकील के भाग्य रेखा को बदल देती है !





लक्ष्मण खैरवाल

पत्रकार , लेखक, एवम श्रम विदि परामर्शी

आजाद नगर, (लाल दुर्गा मंदिर के सामने)
आलमबाग,लखनऊ (२२६००५)

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