Lakshman Khairwal(Great Writer,Journalist,&Legal Adviser)

Sunday, May 29, 2011

माननीय भीम राव आंबेडकर जी के समता मूलक दर्शन का उन के अनुयायियों द्वारा व्याख्या !

समता मूलक समाज की व्याख्या इस प्रकार की जा रही है की पंचसितारा महलो में रहने वालो की जीवन शैली और आर्थिक अवस्था उसी प्रकार बनी रही जिस में कोई परिवर्तन किया जायसर्वहारा और दलितों के झोपड़ पट्टी के दीवारों और फ़र्स को प्लास्टर करा दिया जाय ताकि उन के जीवन की अवस्था में परिवर्तन दिखाई देने लगे
माननीय आंबेडकर जी ने भारतीय सविधान के अनुच्छेद २१ में जीवन और प्राण की सुक्ष। की गारंटी मूल अधिकार के रूप में किया है? जीवन और प्राण के लिए सविधान में रोटी ,रोजी,शीक्ष। ,
साफ पानी, हवा, चिकित्सा,बिजली ,आदि की सुविधा बहुत स्पस्ट रूप से व्याख्या नहीं किया गया है?बी पी एल कार्ड धारको को मुफ्त बिजली कनेकशन दिया जा रहा हैकिन्तु कोई मुफ्त बिजली कनेक्शन लेले को तैयार नहीं हो रहा हैबी.पी.एल कार्ड धारक बिजली का कनेक्शन मुफ्त में ले तो लेते किन्तु जब बिजली का बिल आएगा तो उस बिल का भुगतान कैसे करेंगे क्योकि जब रोजगार ही नहीं है खाने को अन्न नहीं है पीने को साफ़ पानी नहीं मिल रहा है तो बिजली लगा कर बी.पी.एल कार्ड धारक क्या मुफ्ते खुदाई जान आफत में डालेगे ।
मै निर्माण और सौन्द्रिकरण का विरोधी नहीं हूँ । परन्तु जिस निर्माण से किसी का कोई भला हो तो उस निर्माण का मतलब ही क्या रहा !


यहाँ मै मखदूम मोहिउद्धीन का एक शेर लिख रहा हूँ "जिस खेत से दहका को मुअस्सर हो रोटी "उस खेत के हर खोश्ये गन्दुम को जला दो"



लक्ष्मण खैरवाल

पत्रकार,लेखक, एव्म श्रम विधि परामर्शी
आजाद नगर,(लाल दुर्गा मंदिर के सामने)
आलम बाग,लखनऊ (२२६००५)

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